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राजेश्वर वशिष्ठ साहित्य Hindi Literature Collections of Rajeshwar Vashishtha

कुल रचनाएँ: 7

राजेश्वर वशिष्ठ

कुंती की याचना

मित्रता का बोझ
किसी पहाड़-सा टिका था कर्ण के कंधों पर
पर उसने स्वीकार कर लिया था उसे
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वाल्मीकि से अनुरोध

महाकवि वाल्मीकि 
उपजीव्य है आपकी रामायण
तुलसी से लेकर न जाने कितने ही
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जानकी के लिए

मर चुका है रावण का शरीर
स्तब्ध है सारी लंका
सुनसान है किले का परकोटा
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उर्मिला

टिमटिमाते दियों से
जगमगा रही है अयोध्या
सरयू में हो रहा है दीप-दान
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ओम ह्रीं श्री लक्ष्म्यै नमः

हमारे घर में पुस्तकें ही पुस्तकें थीं
चर्चा होती थी वेदों, पुराणों और शास्त्रों की
राम चरित मानस के साथ पढ़ी जाती थी
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एक पगले नास्तिक की प्रार्थना 

मुझे क्षमा करना ईश्वर
मुझे नहीं मालूम कि तुम हो या नहीं
कितने ही धर्मग्रंथों में
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कृतज्ञ हूँ महामाया

अपनी कक्षाओं में घूम रहे हैं 
असंख्य ग्रह और उपग्रह 
जुगनुओं की तरह चमक रहे हैं तारे 
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राजेश्वर वशिष्ठ का जीवन परिचय (Biography)

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