प्रगीत कुँअर | ऑस्ट्रेलिया साहित्य Hindi Literature Collections
कुल रचनाएँ: 3
यूँ तो मिलना-जुलना
यूँ तो मिलना-जुलना चलता रहता है
मिलकर उनका जाना खलता रहता है
उसकी आँखों की चौखट पर एक दिया
पूरा पढ़ें...
मिलकर उनका जाना खलता रहता है
उसकी आँखों की चौखट पर एक दिया
दिन में जो भी प्यारा | ग़ज़ल
दिन में जो भी प्यारा मंज़र लगता है
अंधियारे में देखो तो डर लगता है
आँगन में कर दीं इतनी दीवार खड़ी
पूरा पढ़ें...
अंधियारे में देखो तो डर लगता है
आँगन में कर दीं इतनी दीवार खड़ी
प्रगीत कुँअर के मुक्तक
वो समय कैसा कि जिसमें आज हो पर कल ना हो
वो ही रह सकता है स्थिर हो जो पत्थर जल ना हो
हाथ में लेकर भरा बर्तन ख़ुशी औ ग़म का जब
पूरा पढ़ें...
वो ही रह सकता है स्थिर हो जो पत्थर जल ना हो
हाथ में लेकर भरा बर्तन ख़ुशी औ ग़म का जब