अंग्रेजी के माया मोह से हमारा आत्मविश्वास ही नष्ट नहीं हुआ है, बल्कि हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान भी पददलित हुआ है। - लक्ष्मीनारायण सिंह 'सुधांशु'।

प्रगीत कुँअर | ऑस्ट्रेलिया साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 3

प्रगीत कुँअर | ऑस्ट्रेलिया

यूँ तो मिलना-जुलना

यूँ तो मिलना-जुलना चलता रहता है
मिलकर उनका जाना खलता रहता है
उसकी आँखों की चौखट पर एक दिया
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दिन में जो भी प्यारा | ग़ज़ल

दिन में जो भी प्यारा मंज़र लगता है
अंधियारे में देखो तो डर लगता है
आँगन में कर दीं इतनी दीवार खड़ी
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प्रगीत कुँअर के मुक्तक

वो समय कैसा कि जिसमें आज हो पर कल ना हो
वो ही रह सकता है स्थिर हो जो पत्थर जल ना हो
हाथ में लेकर भरा बर्तन ख़ुशी औ ग़म का जब
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प्रगीत कुँअर | ऑस्ट्रेलिया का जीवन परिचय (Biography)

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