भाषा देश की एकता का प्रधान साधन है। - (आचार्य) चतुरसेन शास्त्री।

नामवर सिंह | Namvar Singh साहित्य Hindi Literature Collections

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आज तुम्हारा जन्मदिवस

आज तुम्हारा जन्मदिवस, यूँ ही यह संध्या
भी चली गई, किंतु अभागा मैं न जा सका
समुख तुम्हारे और नदी तट भटका-भटका
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नामवर सिंह | Namvar Singh का जीवन परिचय (Biography)

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