मृदुला गर्ग | Mridula Garg साहित्य Hindi Literature Collections
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यहाँ क्षण मिलता है
हम सताए, खीजे, उकताए, गड्ढों-खड्ढों, गंदे परनालों से बचते, दिल्ली की सड़क पर नीचे ज़्यादा, ऊपर कम देखते चले जा रहे थे, हर दिल्लीवासी की तरह, रह-रहकर सोचते कि ह?...
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