भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

मोहनलाल महतो वियोगी साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 1

मोहनलाल महतो वियोगी

काठ का घोड़ा

चलता नहीं काठ का घोड़ा!
माँ चिंतित होंगी, ले चल घर, देख बचा दिन थोड़ा
सोने की थी बनी अटारी,
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मोहनलाल महतो वियोगी का जीवन परिचय (Biography)

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