माखनलाल चतुर्वेदी साहित्य Hindi Literature Collections
कुल रचनाएँ: 4
लड्डू ले लो | बाल-कविता
ले लो दो आने के चार
लड्डू राज गिरे के यार
यह हैं धरती जैसे गोल
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लड्डू राज गिरे के यार
यह हैं धरती जैसे गोल
पुष्प की अभिलाषा | कविता
चाह नहीं मैं सुरबाला के,
गहनों में गूँथा जाऊँ,
चाह नहीं प्रेमी-माला में,
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गहनों में गूँथा जाऊँ,
चाह नहीं प्रेमी-माला में,
मेंहदी से तस्वीर खींच ली
मेंहदी से तस्वीर खींच ली किसकी मधुर! हथेली पर ।
प्राणों की लाली-सी है यह, मिट मत जाय
हाथों में रसदान किये यह, छुट मत जाय
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प्राणों की लाली-सी है यह, मिट मत जाय
हाथों में रसदान किये यह, छुट मत जाय
दीप से दीप जले
सुलग-सुलग री जोत दीप से दीप मिलें,
कर-कंकण बज उठे, भूमि पर प्राण फलें।
लक्ष्मी खेतों फली अटल वीराने में
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कर-कंकण बज उठे, भूमि पर प्राण फलें।
लक्ष्मी खेतों फली अटल वीराने में