अंग्रेजी के माया मोह से हमारा आत्मविश्वास ही नष्ट नहीं हुआ है, बल्कि हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान भी पददलित हुआ है। - लक्ष्मीनारायण सिंह 'सुधांशु'।

माखनलाल चतुर्वेदी साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 4

माखनलाल चतुर्वेदी

लड्डू ले लो | बाल-कविता

ले लो दो आने के चार
लड्डू राज गिरे के यार
यह हैं धरती जैसे गोल
पूरा पढ़ें...

पुष्प की अभिलाषा | कविता

चाह नहीं मैं सुरबाला के,
गहनों में गूँथा जाऊँ,
चाह नहीं प्रेमी-माला में,
पूरा पढ़ें...

मेंहदी से तस्वीर खींच ली

मेंहदी से तस्वीर खींच ली किसकी मधुर! हथेली पर ।
प्राणों की लाली-सी है यह, मिट मत जाय
हाथों में रसदान किये यह, छुट मत जाय
पूरा पढ़ें...

दीप से दीप जले

सुलग-सुलग री जोत दीप से दीप मिलें,
कर-कंकण बज उठे, भूमि पर प्राण फलें।
लक्ष्मी खेतों फली अटल वीराने में
पूरा पढ़ें...
माखनलाल चतुर्वेदी का जीवन परिचय (Biography)

मेरी पसंदीदा रचनाएँ

आपने अभी तक कोई रचना सहेज कर नहीं रखी है।