भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

कृश्न चंदर साहित्य Hindi Literature Collections of Krishan Chander

कुल रचनाएँ: 2

कृश्न चंदर

जामुन का पेड़

रात को बड़े जोर का अंधड़ चला। सेक्रेटेरिएट के लॉन में जामुन का एक पेड़ गिर पडा। सुबह जब माली ने देखा तो उसे मालूम हुआ कि पेड़ के नीचे एक आदमी दबा पड़ा है।
म?...
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पूरे चाँद की रात

अप्रैल का महीना था। बादाम की डालियां फूलों से लद गई थीं और हवा में बर्फ़ीली ख़ुनकी के बावजूद बहार की लताफ़त आ गई थी। बुलंद-ओ-बाला तंगों के नीचे मख़मलीं दू?...
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कृश्न चंदर का जीवन परिचय (Biography)

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