नागरी प्रचार देश उन्नति का द्वार है। - गोपाललाल खत्री।

केदारनाथ सिंह साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 3

केदारनाथ सिंह

सुखी आदमी

आज वह रोया
यह सोचते हुए कि रोना
कितना हास्यास्पद है
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भिखारी ठाकुर

विषय कुछ और था
शहर कोई और
पर मुड़ गई बात भिखारी ठाकुर की ओर 
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कुछ सूत्र जो एक किसान बाप ने बेटे को दिए

मेरे बेटे
कुँए में कभी मत झाँकना
जाना
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केदारनाथ सिंह का जीवन परिचय (Biography)

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