अंग्रेजी के माया मोह से हमारा आत्मविश्वास ही नष्ट नहीं हुआ है, बल्कि हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान भी पददलित हुआ है। - लक्ष्मीनारायण सिंह 'सुधांशु'।

कमलेश्वर | Kamleshwar साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 4

कमलेश्वर | Kamleshwar

गर्मियों के दिन | कहानी

चुंगी-दफ्तर खूब रँगा-चुँगा है । उसके फाटक पर इंद्रधनुषी आकार के बोर्ड लगे हुए हैं । सैयदअली पेंटर ने बड़े सधे हाथ से उन बोर्ड़ों को बनाया है । देखते-देखते ?...
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कितने पाकिस्तान

कितना लम्बा सफर है! और यह भी समझ नहीं आता कि यह पाकिस्तान बार-बार आड़े क्यों आता रहा है। सलीमा! मैंने कुछ बिगाड़ा तो नहीं तेरा...तब तूने क्यों अपने को बिगाड़ ...
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चप्पल | कहानी

कहानी बहुत छोटी सी है।
मुझे ऑल इण्डिया मेडिकल इंस्टीटयूट की सातवीं मंज़िल पर जाना था। आई. सी. यू. में। गाड़ी पार्क करके चला तो मन बहुत ही दार्शनिक हो उठा था...
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लाश - कमलेश्वर | कमलेश्वर की कहानियां

सारा शहर सजा हुआ था। खास-खास सड़कों पर जगह-जगह फाटक बनाए गए थे। बिजली के खम्बों पर झंडे, दीवारों पर पोस्टर। वालंटियर कई दिनों से शहर में परचे बाँट रहे थे। म...
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कमलेश्वर | Kamleshwar का जीवन परिचय (Biography)

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