जैमिनी हरियाणवी | Jaimini Hariyanavi साहित्य Hindi Literature Collections
कुल रचनाएँ: 2
वे और तुम | हज़ल
मुहब्बत की रियासत में सियासत जब उभर जाये
प्रिये, तुम ही बताओ जिन्दगी कैसे सुधर जाये?
चुनावों में चढ़े हैं वे, निगाहों में चढ़ी हो तुम
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प्रिये, तुम ही बताओ जिन्दगी कैसे सुधर जाये?
चुनावों में चढ़े हैं वे, निगाहों में चढ़ी हो तुम
प्यार भरी बोली | होली हास्य कविता
होली पर हास्य-कवि जैमिनी हरियाणवी की कविता
होली के दिन ये क्या ठिठोली है
छुट्टी अपनी तो आज हो ली है
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होली के दिन ये क्या ठिठोली है
छुट्टी अपनी तो आज हो ली है