भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

जैमिनी हरियाणवी | Jaimini Hariyanavi साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 2

जैमिनी हरियाणवी | Jaimini Hariyanavi

वे और तुम | हज़ल

मुहब्बत की रियासत में सियासत जब उभर जाये 
प्रिये, तुम ही बताओ जिन्दगी कैसे सुधर जाये? 
चुनावों में चढ़े हैं वे, निगाहों में चढ़ी हो तुम 
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प्यार भरी बोली | होली हास्य कविता

होली पर हास्य-कवि जैमिनी हरियाणवी की कविता
होली के दिन ये क्या ठिठोली है
छुट्टी अपनी तो आज हो ली है
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जैमिनी हरियाणवी | Jaimini Hariyanavi का जीवन परिचय (Biography)

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