जब से हमने अपनी भाषा का समादर करना छोड़ा तभी से हमारा अपमान और अवनति होने लगी। - (राजा) राधिकारमण प्रसाद सिंह।

डॉ. जगदीश व्योम साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 4

डॉ. जगदीश व्योम

मेरा भी तो मन करता है

मेरा भी तो मन करता है
मैं भी पढ़ने जाऊँ
अच्छे कपड़े पहन
पूरा पढ़ें...

बचपन से दूर हुए हम

छीनकर खिलौनो को बाँट दिये गम
बचपन से दूर बहुत दूर हुए हम
अच्छी तरह से अभी पढ़ना न आया
पूरा पढ़ें...

सो गई है मनुजता की संवेदना

सो गई है मनुजता की संवेदना
गीत के रूप में भैरवी गाइए
गा न पाओ अगर जागरण के लिए
पूरा पढ़ें...

माँ | कविता

माँ कबीर की साखी जैसी
तुलसी की चौपाई-सी
माँ मीरा की पदावली-सी
पूरा पढ़ें...
डॉ. जगदीश व्योम का जीवन परिचय (Biography)

मेरी पसंदीदा रचनाएँ

आपने अभी तक कोई रचना सहेज कर नहीं रखी है।