अंग्रेजी के माया मोह से हमारा आत्मविश्वास ही नष्ट नहीं हुआ है, बल्कि हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान भी पददलित हुआ है। - लक्ष्मीनारायण सिंह 'सुधांशु'।

हरिहर झा | ऑस्ट्रेलिया | Harihar Jha साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 4

हरिहर झा  | ऑस्ट्रेलिया | Harihar Jha

कलम गहो हाथों में साथी

कलम गहो हाथों में साथी
शस्त्र हजारों छोड़
तूलिका चले, खुले रहस्य तो
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लिखना बाकी है

शब्दों के नर्तन से शापित
अंतर्मन शिथिलाया
लिखने को तो बहुत लिखा
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मण्डी बनाया विश्व को

लुढ़कता पत्थर शिखर से, क्यों हमें लुढ़का न देगा ।
क्रेन पर ऊँचा चढ़ा कर, चैन उसकी क्यों तोड़ दी
दर्शन बनाया लोभ का , मझधार नैया छोड़ दी
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मदिरा ढलने पर | कविता

 
नजरों से गश आया साकी
मदिरा ढलने पर क्या होगा।
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हरिहर झा | ऑस्ट्रेलिया | Harihar Jha का जीवन परिचय (Biography)

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