भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

गुलज़ार साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 2

गुलज़ार

महामारी लगी थी

घरों को भाग लिए थे सभी मज़दूर, कारीगर
मशीनें बंद होने लग गई थीं शहर की सारी
उन्हीं से हाथ पाओं चलते रहते थे
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मज़दूर

कुछ ऐसे कारवां देखे हैं सैंतालिस में भी मैने
ये गांव भाग रहे हैं अपने वतन में
हम अपने गांव से भागे थे, जब निकले थे वतन को
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गुलज़ार का जीवन परिचय (Biography)

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