भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

गिरिजाकुमार माथुर | Girija Kumar Mathur साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 3

गिरिजाकुमार माथुर |  Girija Kumar Mathur

हिंदी जन की बोली है

एक डोर में सबको जो है बाँधती
वह हिंदी है,
हर भाषा को सगी बहन जो मानती
पूरा पढ़ें...

पन्‍द्रह अगस्‍त

आज जीत की रात
पहरुए, सावधान रहना!
खुले देश के द्वार
पूरा पढ़ें...

हम होंगे कामयाब

हम होंगे कामयाब, हम होंगे कामयाब
हम होंगे कामयाब एक दिन
ओ हो मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास,
पूरा पढ़ें...
गिरिजाकुमार माथुर | Girija Kumar Mathur का जीवन परिचय (Biography)

मेरी पसंदीदा रचनाएँ

आपने अभी तक कोई रचना सहेज कर नहीं रखी है।