गिरिजाकुमार माथुर | Girija Kumar Mathur साहित्य Hindi Literature Collections
कुल रचनाएँ: 3
हिंदी जन की बोली है
एक डोर में सबको जो है बाँधती
वह हिंदी है,
हर भाषा को सगी बहन जो मानती
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वह हिंदी है,
हर भाषा को सगी बहन जो मानती
हम होंगे कामयाब
हम होंगे कामयाब, हम होंगे कामयाब
हम होंगे कामयाब एक दिन
ओ हो मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास,
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हम होंगे कामयाब एक दिन
ओ हो मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास,