डॉ सुनीता शर्मा | न्यूज़ीलैंड साहित्य Hindi Literature Collections
कुल रचनाएँ: 7
शस्य श्यामलां
एक पत्थर फेंका गया मेरे घर में
फ़ेंकना चाहती थी
मैं भी उसे किसी शीश महल में
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फ़ेंकना चाहती थी
मैं भी उसे किसी शीश महल में
मेरा दिल मोम सा | कविता
खिड़की दरवाजे लोहे के बना
बोल्ट कर लिए हैं मैंने
कोई कण धूल-सा आंखों में
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बोल्ट कर लिए हैं मैंने
कोई कण धूल-सा आंखों में
प्रवासी भारतीय तू... | कविता
प्रवासी भारतीय तू
अपनी पैतृक जड़ों से यूं जुड़ तू
भेड़ बकरी की तरह
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अपनी पैतृक जड़ों से यूं जुड़ तू
भेड़ बकरी की तरह