हिंदी उन सभी गुणों से अलंकृत है जिनके बल पर वह विश्व की साहित्यिक भाषाओं की अगली श्रेणी में सभासीन हो सकती है। - मैथिलीशरण गुप्त।

डॉ सुनीता शर्मा | न्यूज़ीलैंड साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 7

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शस्य श्यामलां

एक पत्थर फेंका गया मेरे घर में
फ़ेंकना चाहती थी
मैं भी उसे किसी शीश महल में
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जवाब

दोहराता रहेगा इतिहास
भी युगों-युगों तक यह
दुर्योधन - दुशासन की
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मेरा दिल मोम सा | कविता

खिड़की दरवाजे लोहे के बना
बोल्ट कर लिए हैं मैंने
कोई कण धूल-सा आंखों में
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बस...या ख़ुदा | कविता

बेच रहे थे वह पानी
हवा और ज़मीन,
तब उसे लगता था
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सुनीता शर्मा के हाइकु

भाव ही भाव
आजकल आ-भा-व
है कहीं कहां
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प्रवासी भारतीय तू... | कविता

प्रवासी भारतीय तू
अपनी पैतृक जड़ों से यूं जुड़ तू
भेड़ बकरी की तरह
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दीवानी सी | कविता

एक औरत जो दफन बरसों से
उसने न जाने कैसे
सांसों के आरोह-अवरोह में
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डॉ सुनीता शर्मा | न्यूज़ीलैंड का जीवन परिचय (Biography)

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