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शस्य श्यामलां

शस्य श्यामलां | Hindi poem by Sunita Sharma

एक पत्थर फेंका गया मेरे घर में
फ़ेंकना चाहती थी
मैं भी उसे किसी शीश महल में
पर आ किसी ने हाथ रोक लिए
मंदिर में सजा दिया उसे
अब हो व्याकुल
कहीं नमी देखते ही
बो देना चाहती हूँ
आस्था विश्वास के बीज
लहलहा उठे फसलें
हृदय हो उठे फिर शस्य श्यामलां

-सुनीता शर्मा
 ऑकलैंड, न्यूज़ीलैंड
 ई-मेल: adorable_sunita@hotmail.com

 

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