वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं। - गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही'।

डॉ संध्या सिंह | सिंगापुर साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 5

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मलय व हिन्दी का मेल

एक भाषा सिर्फ़ शब्दों और व्याकरण से बहुत आगे है। यह संस्कृति का प्राण है और उसका शरीर भी। यह वह प्रकाश है जो हमारे ज्ञान के सफ़र को न सिर्फ़ प्रकाशित करता ?...
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रूस के प्रो. लुदमिला खोखलोवा से बातचीत

 “हिंदी दोस्ती की भाषा है, इससे अलग किस्म के सपने पूरे होते हैं।”
प्रोफेसर लुदमिला खोखलोवा जी मास्को स्टेट यूनिवर्सिटी में असोसिएट प्रोफ़ेसर हैं। प?...
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एक लड़की

आज बार-बार जीवन बाईस साल पहले मुड़ उस दिन को याद कर रहा है जिसने एक लड़की के जीवन को एक अलग ही दिशा दे दी। नवरात्रि का समय और देवी दर्शन की चाह लिए एक लड़की व?...
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सिंगापुर में हिंदी का फ़लक | विश्व में हिंदी

विश्व आज वैश्विक गाँव बनता जा रहा है और इस वैश्विक गाँव में तमाम भाषाएँ अपने वजूद को बरक़रार रखने की कोशिश में लगी हैं। एक भाषा का हावी होना कई बार दूसरी भ?...
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डॉ. संध्या सिंह की चार कविताएं

नयापन ज़िंदगी है
बासी का अंत है
सुबह नई है
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डॉ संध्या सिंह | सिंगापुर का जीवन परिचय (Biography)

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