दीपा शर्मा | फीजी साहित्य Hindi Literature Collections
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एक दीया मस्तिष्क में जलाएं
आजकल हर समय विचारों के झंझावात चलते रहते हैं
सही गलत का नहीं पता कुछ, बस यह यूं ही बढ़ते रहते हैं
कभी किसी बात में होता चिंतन किसी ने मनन
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सही गलत का नहीं पता कुछ, बस यह यूं ही बढ़ते रहते हैं
कभी किसी बात में होता चिंतन किसी ने मनन