भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

देवेन्द्र कुमार मिश्रा साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 2

देवेन्द्र कुमार मिश्रा

हौसला

कागज की नाव बही
और डूब गई
बात डूबने की नहीं
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भूखे-प्यासे

वे भूखे प्यासे, पपड़ाये होंठ
सूखे गले, पिचके पेट, पैरों में छाले लिए
पसीने से तरबतर, सिरपर बोझा उठाये
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देवेन्द्र कुमार मिश्रा का जीवन परिचय (Biography)

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