भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

चित्रा मुद्गल साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 3

चित्रा मुद्गल

रिश्ता

लगभग बाईस दिनों तक 'कोमा' में रहने के बाद जब उसे होश आया था तो जिस जीवनदायिनी को उसने अपने करीब, बहुत निकट पाया था, वे थी, मारथा मम्मी। अस्पताल के अन्य मरीजों...
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मर्द

आधी रात में उठकर कहां गई थी?"
शराब में धुत्त पति बगल में आकर लेटी पत्नी पर गुर्राया।
"आंखों को कोहनी से ढांकते हुए पत्नी ने जवाब दिया, "पेशाब करने!"
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भूख | कहानी

आहट सुन लक्ष्मा ने सूप से गरदन ऊपर उठाई। सावित्री अक्का झोंपड़ी के किवाड़ों से लगी भीतर झांकती दिखी। सूप फटकारना छोड़कर वह उठ खड़ी हुई, ‘‘आ, अंदर कू आ, ?...
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चित्रा मुद्गल का जीवन परिचय (Biography)

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