बिहारी साहित्य Hindi Literature Collections of Bihari
कुल रचनाएँ: 3
बिहारी के होली दोहे
होली पर बिहारी के कुछ दोहे
उड़ि गुलाल घूँघर भई तनि रह्यो लाल बितान।
चौरी चारु निकुंजनमें ब्याह फाग सुखदान॥
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उड़ि गुलाल घूँघर भई तनि रह्यो लाल बितान।
चौरी चारु निकुंजनमें ब्याह फाग सुखदान॥
श्याम सुंदर पर दोहे
मेरी भवबाधा हरो, राधा नागरि सोय।
जा तन की झाँई परे, स्याम हरित दुति होय॥
सरलार्थ : मेरी सांसारिक बाधा को, जन्म-मरण की आपदाओं को, वे राधा नागरी दूर करे?...
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जा तन की झाँई परे, स्याम हरित दुति होय॥
सरलार्थ : मेरी सांसारिक बाधा को, जन्म-मरण की आपदाओं को, वे राधा नागरी दूर करे?...
बिहारी के दोहे | Bihari's Couplets
रीति काल के कवियों में बिहारी सर्वोपरि माने जाते हैं। सतसई बिहारी की प्रमुख रचना हैं। इसमें 713 दोहे हैं। बिहारी के दोहों के संबंध में किसी ने कहा हैः
सतसइ...
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सतसइ...