अशोक चक्रधर साहित्य Hindi Literature Collections
कुल रचनाएँ: 6
परदे हटा के देखो
ये घर है दर्द का घर, परदे हटा के देखो,
ग़म हैं हँसी के अंदर, परदे हटा के देखो।
लहरों के झाग ही तो, परदे बने हुए हैं,
पूरा पढ़ें...
ग़म हैं हँसी के अंदर, परदे हटा के देखो।
लहरों के झाग ही तो, परदे बने हुए हैं,