राष्ट्रीय एकता की कड़ी हिंदी ही जोड़ सकती है। - बालकृष्ण शर्मा 'नवीन'

अशोक चक्रधर साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 6

अशोक चक्रधर

परदे हटा के देखो

ये घर है दर्द का घर, परदे हटा के देखो,
ग़म हैं हँसी के अंदर, परदे हटा के देखो।
लहरों के झाग ही तो, परदे बने हुए हैं,
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बहरे या गहरे

अचानक तुम्हारे पीछे
कोई कुत्ता भोंके,
तो क्या तुम रह सकते हो
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समंदर की उम्र

लहर ने
समंदर से
उसकी उम्र पूछी,
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तुम' से 'आप'

तुम भी जल थे
हम भी जल थे
इतने घुले-मिले थे कि
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गति का कुसूर

क्या होता है कार में
पास की चीज़ें
पीछे दौड़ जाती हैं
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नन्ही सचाई

एक डॉक्टर मित्र हमारे
स्वर्ग सिधार।
कोरोना से मर गए,
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अशोक चक्रधर का जीवन परिचय (Biography)

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