आशीष मिश्रा | इंग्लैंड साहित्य Hindi Literature Collections
कुल रचनाएँ: 4
हिंद को सलाम करें, शान के लिये
तीन रंग से बना है, ध्वज यहाँ खड़ा
शौर्य और शूरता से भव्य है बड़ा
और जिसे देखकर वीर कह उठा
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शौर्य और शूरता से भव्य है बड़ा
और जिसे देखकर वीर कह उठा
ये बिछा लो आँचल में
भर कर लाया फूल हथेली, प्रिये बिछा लो आँचल में
कुछ गुथने को तत्पर हैं, कुछ उगने को आँगन में।
लाल रंग के फूल चार हैं, चार गुलाबी वाले हैं
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कुछ गुथने को तत्पर हैं, कुछ उगने को आँगन में।
लाल रंग के फूल चार हैं, चार गुलाबी वाले हैं