अंग्रेजी के माया मोह से हमारा आत्मविश्वास ही नष्ट नहीं हुआ है, बल्कि हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान भी पददलित हुआ है। - लक्ष्मीनारायण सिंह 'सुधांशु'।

अरुणा सब्बरवाल साहित्य Hindi Literature Collections of Aruna Sabharwal

कुल रचनाएँ: 4

अरुणा सब्बरवाल

छोटा सा शीश महल | कहानी

परेशान थी वह। परेशानियों जैसी परेशानी थी। दिल में एक दर्द जमा बैठा था। पिघलता ही नहीं। आकाश से बर्फ गिरती है। दो-तीन दिन में पिघल जाती है। किंतु कैसी पीड़...
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इंग्लिश रोज़ | कहानी

वह आज भी खड़ी है... वक्त जैसे थम गया है... दस साल कैसे बीत जाते हैं... इतने वर्ष.... वही गाँव...वही नगर...वही लोग... यहाँ तक कि फूल और पत्तियां तक नहीं बदले। टूलिप्स सफे?...
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रॉकिंग-चेयर | कहानी

ट्रक को आते देख कर उसकी ख़ुशी का ठिकाना न रहा। वह इतनी ख़ुश थी कि अपनी ख़ुशी को व्यक्त करने के लिए उसे शब्द नहीं मिल रहे थे। बचपन से ही उसका दिल्ली जैसे बड़?...
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ललक | कहानी

आज फिर मैंने उन्हें देखा, जिन्हें मैं पिछले तीन वर्षों से देखती आई हूँ, किंतु बात करने का अवसर नहीं मिला, या यूँ कहो साहस ही नहीं जुटा पाई। 
वैसे तो उसी मॉ?...
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अरुणा सब्बरवाल का जीवन परिचय (Biography)

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