देहात का विरला ही कोई मुसलमान प्रचलित उर्दू भाषा के दस प्रतिशत शब्दों को समझ पाता है। - साँवलिया बिहारीलाल वर्मा।

अंजुम रहबर साहित्य Hindi Literature Collections

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अंजुम रहबर

चेहरे से दिल की बात | ग़ज़ल

चेहरे से दिल की बात छलकती ज़रूर है,
चांदी हो चाहे बर्क चमकती ज़रूर है।
दिल तो कई दिनों से कहीं खो गया मगर,
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अंजुम रहबर का जीवन परिचय (Biography)

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