अनिता बरार | ऑस्ट्रेलिया साहित्य Hindi Literature Collections
कुल रचनाएँ: 4
मेरी अभिलाषा | कविता
चाहती हूँ आज देना, प्यार का उपहार जग को।।
मुग्ध सपनों के जगत से माँग मैं अरमान लायी,
भावनाओ के भवन से साथ मधु के गान लायी।
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मुग्ध सपनों के जगत से माँग मैं अरमान लायी,
भावनाओ के भवन से साथ मधु के गान लायी।
दूर गगन पर | गीत
दूर गगन पर सँध्या की लाली
सतरंगी सपनों की चुनरी लहरायी
आँचल में भरकर तुझे ओ चंदा
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सतरंगी सपनों की चुनरी लहरायी
आँचल में भरकर तुझे ओ चंदा
तीन पत्र | कहानी
निनी ने फोन को टेबल पर रक्खा। कांपते हाथों से आँसू पोंछते हुए खिड़की से बाहर देखा । काले बादलों के बीच सूरज कहीं छुप गया था । दूर समुद्री लहरें उफान पर थी, ?...
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