अनिल जोशी | Anil Joshi साहित्य Hindi Literature Collections
कुल रचनाएँ: 8
हैरान परेशान, ये हिन्दोस्तान है
हैरान परेशान, ये हिन्दोस्तान है
ये होंठ तो अपने हैं, पर किसकी जुबान है
जुगनू मना रहे हैं जश्न, आप देखिए
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ये होंठ तो अपने हैं, पर किसकी जुबान है
जुगनू मना रहे हैं जश्न, आप देखिए
क्या तुमने उसको देखा है
वो भटक रहा था यहाँ - वहाँ
ढूंढा ना जाने कहाँ - कहाँ
जग चादर तान के सोता था
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ढूंढा ना जाने कहाँ - कहाँ
जग चादर तान के सोता था
भटका हुआ भविष्य
उसने मुझे जब हिन्दी में बात करते हुए सुना,
तो गौर से देखा
और अपने मित्र से कहा--
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तो गौर से देखा
और अपने मित्र से कहा--
घर
शाम होते ही
वो कौन-से रास्ते हैं, जिन पर मैं चल पड़ता हूँ
वो किसके पैरों के निशान हैं, जिनका मैं पीछा करता हूँ
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वो कौन-से रास्ते हैं, जिन पर मैं चल पड़ता हूँ
वो किसके पैरों के निशान हैं, जिनका मैं पीछा करता हूँ
बेटी को उसके अठाहरवें जन्मदिन पर पत्र
आशा है तुम सकुशल होगी
शुभकामनाएं और
तुम्हारी भावी यात्रा के बारे में कुछ राय
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शुभकामनाएं और
तुम्हारी भावी यात्रा के बारे में कुछ राय
जीवन से बाजी में, समय देखो जीत गया
जीवन से बाजी में, समय देखो जीत गया
आयु का अमृत घट, पल-पल कर रीत गया
जीवन से बाजी में, समय देखो जीत गया
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आयु का अमृत घट, पल-पल कर रीत गया
जीवन से बाजी में, समय देखो जीत गया
जैसे मेरे हैं...
जैसे मेरे हैं, वैसे सबके हों प्रभु
उसने सिर्फ आँखें नहीं दी,
दृष्टि भी दी,
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उसने सिर्फ आँखें नहीं दी,
दृष्टि भी दी,