यह संदेह निर्मूल है कि हिंदीवाले उर्दू का नाश चाहते हैं। - राजेन्द्र प्रसाद।

Atal Bihari Vajpayee

एक साधारण अध्यापक 'कृष्ण बिहारीलाल वाजपेयी' के पुत्र अटल बिहारी वाजपेयी दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री बने। अटल जी का जन्म 25 दिसंबर 1925 को हुआ था।

वाजपेयी की प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा ग्वालियर के ही विक्टोरिया (लक्ष्मीबाई ) कॉलेज और कानपुर के डीएवी कॉलेज में हुई। उन्होंने राजनीतिक विज्ञान में स्नातकोत्तर की।

एक साधारण अध्यापक 'कृष्ण बिहारीलाल वाजपेयी' के पुत्र अटल बिहारी वाजपेयी दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री बने। अटल जी का जन्म 25 दिसंबर 1925 को हुआ था।

वाजपेयी की प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा ग्वालियर के ही विक्टोरिया (लक्ष्मीबाई ) कॉलेज और कानपुर के डीएवी कॉलेज में हुई। उन्होंने राजनीतिक विज्ञान में स्नातकोत्तर की। अटलजी तीन बार प्रधानमंत्री रहे। राष्ट्र के प्रति उनकी समर्पित सेवाओं के लिए 1992 में राष्ट्रपति ने उन्हें 'पद्म विभूषण से अलंकृत किया।

1993 में कानपुर विश्वविद्यालय ने उन्हें फिलॉसफी में डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्रदान की।

1994 में 'लोकमान्य तिलक पुरस्कार' दिया गया। 1994 में 'लोकमान्य तिलक पुरस्कार' दिया गया। 1994 में में ‘सर्वश्रेष्ठ सांसद' चुना गया और गोविंद बल्लभ पंत पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया।

कवि-हृदय राजनेता अटल बिहारी वाजपेयी संवेदनशील मन के ओजस्वी रचनाकार रहे हैं। राजनीति में सक्रिय रहते हुए भी उनके संवेदनशील और हृदयस्पर्शी भाव कविताओं के रूप में प्रकट होते रहे।

आपकी कविताओं ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई और पाठकों द्वारा सराही गईं। इनकी कविताओं में स्वाभिमान, देशानुराग, त्याग, बलिदान, अन्याय के प्रति विद्रोह, आस्था एवं समर्पण का भाव रहा है।

सम्पादन
अटलजी ने पांचजन्य, राष्ट्रधर्म, दैनिक स्वदेश, चेतना और वीर अर्जुन का संपादन किया।

प्रकाशित पुस्तकें
मृत्यु या हत्या, अमर बलिदान, कैदी कविराय की कुण्डलियाँ, लोक सभा में अटल जी, संसद में तीन दशक, अमर आग, मेरी इक्यावन कविताएँ, कुछ लेख कुछ भाषण, राजनीति की रपटीली राहें, बिन्दु - बिन्दु विचार, सेक्युलरवाद।

निधन
16 अगस्त 2018 को आपका निधन हो गया।

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कौरव कौन, कौन पांडव

कौरव कौन
कौन पांडव,
टेढ़ा सवाल है।

दोनों ओर शकुनि
का फैला
कूटजाल है।

धर्मराज ने छोड़ी नहीं
जुए की लत है।
हर पंचायत में
पांचाली
अपमानित है।

बिना कृष्ण के
आज
महाभारत होना है,
कोई राजा बने,
रंक को तो रोना है।

- अटल बिहारी वाजपेयी


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झुक नहीं सकते | कविता

टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते।
सत्य का संघर्ष सत्ता से,
न्याय लड़ता निरंकुशता से,
अंधेरे ने दी चुनौती है,
किरण अंतिम अस्त होती है।

दीप निष्ठा का लिये निष्कंप,
वज्र टूटे या उठे भूकंप,
यह बराबर का नहीं है युद्ध,
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कवि आज सुना वह गान रे

कवि आज सुना वह गान रे,
जिससे खुल जाएँ अलस पलक।
नस-नस में जीवन झंकृत हो,
हो अंग-अंग में जोश झलक।

ये - बंधन चिरबंधन
टूटें - फूटें प्रासाद गगनचुम्बी
हम मिलकर हर्ष मना डालें,
हूकें उर की मिट जाएँ सभी।

यह भूख - भूख सत्यानाशी
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रोते-रोते रात सो गई

झुकी न अलकें
झपी न पलकें
सुधियों की बारात खो गई

दर्द पुराना
मीत न जाना
बातों ही में प्रातः हो गई

घुमड़ी बदली
बूँद न निकली
बिछुड़न ऐसी व्यथा बो गई
रोते-रोते रात सो गई

-अटल बिहारी वाजपेयी