भाषा राष्ट्रीय शरीर की आत्मा है। - स्वामी भवानीदयाल संन्यासी।

मंजुल भटनागर

मंजुल भटनागर ने यूं तो विभिन्न विधाओं में साहित्य-सृजन किया है लेकिन बाल साहित्य में आपने विशेष योगदान दिया है। आपकी कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।

मेरी पसंदीदा रचनाएँ

आपने अभी तक कोई रचना सहेज कर नहीं रखी है।