घरों को भाग लिए थे सभी मज़दूर, कारीगर मशीनें बंद होने लग गई थीं शहर की सारी उन्हीं से हाथ पाओं चलते रहते थे
कुछ ऐसे कारवां देखे हैं सैंतालिस में भी मैने ये गांव भाग रहे हैं अपने वतन में हम अपने गांव से भागे थे, जब निकले थे वतन को