गुलज़ार साहित्य Hindi Literature Collections
कुल रचनाएँ: 2
महामारी लगी थी
घरों को भाग लिए थे सभी मज़दूर, कारीगर
मशीनें बंद होने लग गई थीं शहर की सारी
उन्हीं से हाथ पाओं चलते रहते थे
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मशीनें बंद होने लग गई थीं शहर की सारी
उन्हीं से हाथ पाओं चलते रहते थे
मज़दूर
कुछ ऐसे कारवां देखे हैं सैंतालिस में भी मैने
ये गांव भाग रहे हैं अपने वतन में
हम अपने गांव से भागे थे, जब निकले थे वतन को
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ये गांव भाग रहे हैं अपने वतन में
हम अपने गांव से भागे थे, जब निकले थे वतन को