निराला की कविता, 'तोड़ती पत्थर' को सपना सिंह (सोनश्री) आज के परिवेश में कुछ इस तरह से देखती हैं: आज भी खड़ी वो... तोडती पत्थर,
निराला पर सपना सिंह (सोनश्री) की कविता निराला जी, निराले थे। इसलिए तो,