आराधना झा श्रीवास्तव साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 6

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जीवन का राग

जीवन का ये जो राग है
निर्मल है, ये बेदाग़ है,
तुम छेड़ो न इस राग को

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तलाश जारी है...

स्वदेस में बिहारी हूँ, परदेस में बाहरी हूँ
जाति, धर्म, परंपरा के बोझ तले दबी एक बेचारी हूँ।
रंग-रूप,नैन-नक्श, बोल-चाल, रहन-सहन

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गीता का सार

तू आप ही अपना शत्रु है
तू आप ही अपना मित्र,
या रख जीवन काग़ज़ कोरा

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माँ अमर होती है, माँ मरा नहीं करती

माँ अमर होती है,
माँ मरा नहीं करती।
माँ जीवित रखती है

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आराधना झा श्रीवास्तव के हाइकु

वृत्त में क़ैद
गोल गोल घूमती
धुरी सी माँ

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वो राम राम कहलाते हैं

अवधपुरी से जनकपुरी तक
प्रेम की गंगा बहाते हैं
वो राम राम कहलाते हैं।

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आराधना झा श्रीवास्तव का जीवन परिचय