प्रो. राजेश कुमार साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 12

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अच्छा है कि दिल पास में नहीं था

हैप्पी जी को दिल का दौरा पड़ गया, और उन्हें दो स्टंट लगवाने पड़े। हैप्पी जी विदेश में रहते हैं, इसलिए उनकी चिकित्सा देखभाल तत्काल हो गई। अगर हमारी तरह भार?...

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कला कौ अंग | दोहे

लेखक का गुण एक ही करै भँडौती धाय।
पुरस्कार पै हो नज़र ग्रांट कहीं मिल जाय॥
तू लिख तारीफ़ मैं और करैं विपरीत।

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तेरा न्यू ईयर तो मेरा नया साल

नया साल आ गया है और हमारे महाकवि इस तैयारी में है किस अभूतपूर्व और बेजोड़ तरीके से लोगों को नए साल की शुभकामनाएँ दी जाएँ कि वे बस अश-अश करते रह जाएँ। तभी उन?...

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हिंदी में उर्दू शब्दों का इस्तेमाल

हम कभी-कभी शुद्धतावादी लोगों से सुनते हैं कि हिंदी में उर्दू शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। आपने इस तरह की सूची भी देखी होगी, जिसमें लोग उर्दू शब्दो?...

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प्रो. राजेश कुमार के दोहे

नव पल्लव इठलात हैं हर्ष न हिये समात।
हिल-डुल न्यौता देत हैं मौसम की क्या बात॥
पात पात सब झरि गए जर्जर लगता ठूँठ।

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दोगलों का इलाज | व्यंग्य

यह कहानी एक डॉक्टर की है, और इसके साथ ही इसमें सामाजिक कुरीति भी जुड़ गई है, तो आप देख सकते हैं कि लेखक ने इसमें कितना नवोन्मेष कर दिया है। तो हमारे जो डॉक्ट?...

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अपने-अपने युद्ध, अपनी-अपनी झंडाबरदारी

झंडा हमारा गौरव है, हमारी शान है, हमारी बान है, हमारी आन है, हमारी पहचान है। लहराते हुए झंडे को देखते ही महाकवि के शरीर में सिहरन दौड़ जाती है, वे देश-प्रेम क?...

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पत्रकार, आज़ादी और हमला

मास्टर अँगूठाटेक परेशानी की हालत में इधर से उधर फिर रहे थे, जैसे कोई बहुत ग़लत घटना हो गई हो, और वे उसे सुधारने के लिए भी कुछ न कर पा रहे हों।
“क्यों परेशान...

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और बुलडोज़र गिरफ़्तार हो गया

यह इतना आसान काम नहीं था, लेकिन आखिर पुलिस ने अपनी मुस्तैदी से बुलडोज़र को गिरफ़्तार कर ही लिया। बुलडोज़र के लिए हथकड़ी अभी तक नहीं बनी है, इसलिए पुलिस ने ?...

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महाकवि और धारा 420 सीसी की छूट

महाकवि रोज़-रोज़ की बढ़ने वाली क़ीमतों, पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतों में लगी हुई आग, और रोज़-रोज़ लगाए जाने वाले तरह-तरह के टैक्स से बहुत परेशान थे। वे अपनी ...

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लेखक पर दोहे

लेखक का गुण एक ही करै भँडौती धाय।
पुरस्कार पै हो नज़र ग्रांट कहीं मिल जाय॥
तू लिख तारीफ़ मैं और करैं विपरीत।

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पासपोर्ट की एफ़.आई.आर | व्यंग्य

मेरा पासपोर्ट कहीं खो गया था। मुझे याद है कि पिछली बार मैंने उसे अपने बैग में रखा था। अपनी चीज़ों के मामले में मैं बहुत लापरवाह हूँ। मैं बैग को अपने दफ़्त?...

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प्रो. राजेश कुमार का जीवन परिचय