लिखने को कुछ और चला था स्वतः कलम ने राम लिखा र पर आ की एक मात्रा
काश! मुझे कविता आती लिख देता उनको पुस्तक-सा प्रेम भरा दोहा लिखता
तीन रंग से बना है, ध्वज यहाँ खड़ा शौर्य और शूरता से भव्य है बड़ा और जिसे देखकर वीर कह उठा
भर कर लाया फूल हथेली, प्रिये बिछा लो आँचल में कुछ गुथने को तत्पर हैं, कुछ उगने को आँगन में। लाल रंग के फूल चार हैं, चार गुलाबी वाले हैं