डॉ रमेश पोखरियाल निशंक साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 13

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बस एक ही इच्छा

उसका भोला-भाला चेहरा न जाने क्यों मुझे बार-बार अपनी ओर आकर्षित किये जा रहा था। उसने मेरा सूटकेस पकड़ा और कमरे की ओर चल दिया। कमरे से सम्बंधित सभी जानकारी ?...

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मनीऑर्डर

'सुन्दरू के पिता का मनीऑर्डर नहीं आया, इस बार न जाने क्यों इतनी देर हो गयी? वैसे महीने की दस से पन्द्रह तारीख के बीच उनके रुपये आ ही जाते थे। उनकी ड्यूटी आजक?...

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हिंदी देश की शान

एकता की सूचक हिदी भारत माँ की आन है,
कोई माने या न माने हिदी देश की शान है।
भारत माँ का प्राण है

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मातृ-वंदना

कंठ तेरे हैं अनेकों, स्वर तुम्हारा एक है,
स्वर तुम्हारे पूज्यपादों में भी मेरा एक है।
कंठ सारे एक होकर, गान तेरा ही करें,

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देश पीड़ित कब तक रहेगा

अगर देश आँसू बहाता रहा तो,
ये संसार सोचो हमें क्या कहेगा?
नहीं स्वार्थ को हमने त्यागा कहीं तो

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ये देश है विपदा में

देश हमारा है विपदा में, साथी तुम उठ जाओ।
सब कुछ न्यौछावर कर दो,
देशभक्ति मन में भर दो,

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हम दुनिया की शान

हिदुभूमि के निवासी, हम दुनिया की शान हैं।
रंग-रूप सब भिन्न-भिन्न पर
राष्ट्र मन सब एक हैं,

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काँटों की गोदी में

काँटों की शैया में जिसने
कोमलता को छोड़ा ना,
चुभन पल-पल होने पर भी

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साथ लिए जा

दुर्गम और भीषण
बड़ी चट्टानें पार कर,
उसको भी तू साथ लिए जा

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कसौटी

जो चटटानों से न टकराए
वो कब झरना बनता है,
उलझते टकराते इन राहों में

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मुकाम

हमेशा छोटी-छोटी
गलतियों से बचना
अच्छा होता है,

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जीवन और मौसम

छँटने लगे हैं बादल
धुंध होने लगी कम,
नई सुबह की है आहट

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रमेश पोखरियाल 'निशंक' की क्षणिकाएँ

रिश्ते
रिश्ते निभाने के लिए
कहाँ कसमें खानी पड़ती हैं

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डॉ रमेश पोखरियाल निशंक का जीवन परिचय