इक अनजाने देश में जब भी, मैं चुप हो रह जाता हूँ, अपना मन उल्लास से भरने, देश तुझे ही गाता हूँ| शुभ्र हिमालय सर हो मेरा,
आ जा सुर में सुर मिला ले, यह मेरा ही गीत है, एक मन एक प्राण बन जा, तू मेरा मनमीत है। सुर में सुर मिल जाए इतना, सुर अकेला न रहे,