बाढ़ उतार पर थी और मैं नाव से गाँव जा रहा था। रास्ता लंबा था, कुआर की चढ़ती धूप, किसी तरह विषगर्भ दुपहरी काटनी थी, इसलिए माँझी से ही बातचीत का सिलसिला जमाय...
लोग कहेंगे कि दीवाली के दिन कुछ अधिक मात्रा में चढ़ाली है, नहीं तो जगर-मगर चारों ओर बिजली की ज्योति जगमग रही है और इसको यही सूझता है कि दिया, वह भी दिए नही?...