बलराम अग्रवाल साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 4

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ज़हर की जड़ें

दफ़्तर से लौटकर मैं अभी खाना खाने के लिए बैठा ही था कि डॉली ने रोना शुरू कर दिया।
"अरे-अरे-अरे, किसने मारा हमारी बेटी को?" उसे दुलारते हुए मैंने पूछा।
"डैडी, ह?...

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अपने-अपने आग्रह 

"तुझे मेरा नाम मालूम नहीं है क्या?" वह उस पर चीखा। 
"है न-रामरक्खा!" 
"रामरक्खा नहीं, अल्लारक्खा।" 

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दो और दो

"यार, ये दो और दो चार वाला मुहावरा अव्यवहारिक नहीं है?" 
"भाई, ये मुहावरा नहीं है... सूत्र है गणित का।" 
"सूत्र ही सही, लेकिन इस्तेमाल तो मुहावरे की तरह ही होत?...

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दरख्त | लघुकथा

“आप कहते हैं कि घर के बाहर खड़े आपके दरख्त को ये अपने घर उठा ले गये!”
“जी हुजूर!”
“किस फल का दरख्त था?”

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बलराम अग्रवाल का जीवन परिचय