सुशांत सुप्रिय साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 24

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वे

रेलगाड़ी के इस डिब्बे में वे चार हैं, जबकि मैं अकेला । वे हट्टे-कट्टे हैं , जबकि मैं कमज़ोर-सा । वे लम्बे-तगड़े हैं, जबकि मैं औसत क़द-काठी का । जल्दबाज़ी में ?...

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बदबू

रेल-यात्राओं का भी अपना ही मज़ा है । एक ही डिब्बे में पूरे भारत की सैर हो जाती है । 'आमार सोनार बांग्ला' वाले बाबू मोशाय से लेकर 'बल्ले-बल्ले' वाले सरदारजी तक...

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इंडियन काफ़्का

मैं हूँ, कमरा है, दीवारें हैं, छत है, सीलन है, घुटन है, सन्नाटा है और मेरा अंतहीन अकेलापन है। हाँ, अकेलापन, जो अकसर मुझे कटहे कुत्ते-सा काटने को दौड़ता है । पर ?...

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कबीर | सुशांत सुप्रिय की कविता

एक दिन आप
घर से बाहर निकलेंगे
और सड़क किनारे

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माँ | सुशांत सुप्रिय की कविता

इस धरती पर
अपने शहर में मैं
एक उपेक्षित उपन्यास के बीच में

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लौटना | सुशांत सुप्रिय की कविता

बरसों बाद लौटा हूँ
अपने बचपन के स्कूल में
जहाँ बरसों पुराने किसी क्लास-रूम में से

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एक ठहरी हुई उम्र | सुशांत सुप्रिय की कविता

मैं था तब इक्कीस का
और वह थी अठारह की
हाथी-दाँत-सा उजला था उसका मन

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हर बार | सुशांत सुप्रिय की कविता

हर बार
अपनी तड़पती छाया को
अकेला छोड़ कर

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छटपटाहट भरे कुछ नोट्स | सुशांत सुप्रिय की कविता

                                   ( एक )
आज चारो ओर की बेचैनी से बेपरवाह
जो लम्बी ताने सो रहे हैं

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जब दुख मेरे पास बैठा होता है | सुशांत सुप्रिय की कविता

जब दुख मेरे पास बैठा होता है
मैं सब कुछ भूल जाता हूँ
पता नहीं सूरज और चाँद

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गुजरात : 2002 | सुशांत सुप्रिय की कविता

जला दिए गए मकान में
मैं नमाज़ पढ़ रहा हूँ
उस मकान में जो अब नहीं है

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पांच कविताएं | सुशांत सुप्रिय की कविता

विडम्बना
                                 
कितनी रोशनी है

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आज का आदमी | सुशांत सुप्रिय की कविता

मैं ढाई हाथ का आदमी हूँ
मेरा ढाई मील का ' ईगो ' है
मेरा ढाई इंच का दिल है

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अहसास | सुशांत सुप्रिय की कविता

जब से मेरी गली की कुतिया
झबरी चल बसी थी
गली का कुत्ता कालू

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एक चोरी अजीब-सी

यह कहानी सुनने के लिए आपको अपना काम छोड़ कर मेरे साथ रात के नौ बजे नुक्कड़ के ढाबे के भीतरी केबिन में चलना होगा जहाँ इलाक़े के चार-पाँच चोर और पॉकेटमार जमा ...

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सुशांत सुप्रिय की कविताएं

सुशांत सुप्रिय की कविताएं का संकलन।

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सुशांत सुप्रिय की तीन कविताएं

पड़ोसी
मेरे घर के
ठीक बगल में हैं उनके घर

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गनेशी की कथा - सुशांत सुप्रिय की कहानी

कहानी की शुरुआत कैसे की जानी चाहिए ? मैं इस कहानी की शुरुआत 'वंस अपान अ टाइम, देयर लिव्ड अ पर्सन नेम्ड गनेशी' वाले अंदाज़ में कर सकता हूँ । या मैं कहानी की शु?...

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लौटना - सुशांत सुप्रिय की कहानी

समुद्र का रंग आकाश जैसा था । वह पानी में तैर रही थी । छप्-छप्, छप्-छप् । उसे तैरना कब आया ? उसने तो तैरना कभी नहीं सीखा । फिर यह क्या जादू था ? लहरें उसे गोद में ?...

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बौड़म दास

बौड़म दास को मैं क़रीब से जानता था । हमारा गाँव चैनपुर भैरवी नदी के किनारे बसा हुआ है । उसके दूसरे किनारे पर बसा है धरहरवा गाँव । साल के बाक़ी समय में यह नद?...

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भूकम्प

" समय के विराट् वितान में मनुष्य एक क्षुद्र इकाई है । "
--- अज्ञात ।
ध्वस्त मकानों के मलबों में हमें एक छेद में से वह दबी हुई लड़की दिखी। जब खोजी कुत्तों ने उस?...

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एक गुम-सी चोट

कैसा समय है यह
जब बौने लोग डाल रहे हैं
लम्बी परछाइयाँ

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कुतिया के अंडे

उन दिनों एक मिशन के तहत हम दोनों को शहर के बाहर एक बंगले में रखा गया था - मुझे और मेरे सहयोगी अजय को। दोपहर में सुनीता नाम की बाई आती थी और वह दोपहर और शाम - दो?...

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सुशांत सुप्रिय का जीवन परिचय