हिंदी भाषा अपनी अनेक धाराओं के साथ प्रशस्त क्षेत्र में प्रखर गति से प्रकाशित हो रही है। - छविनाथ पांडेय।

ज़िंदगी

ज़िंदगी | Life by Rohit Kumar Happy

लाचारी है,
बीमारी है,
...फिर भी
ज़िंदगी सभी को प्यारी है!

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- रोहित
  संपादक, भारत-दर्शन
  न्यूज़ीलैंड


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