भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

वल्लाह किस जुनूँ के सताए हुए हैं लोग | ग़ज़ल

रचनाकार: अदम गोंडवी
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वल्लाह किस जुनूँ के सताए हुए हैं लोग | Hindi Ghazal by Adam Gondvi

वल्लाह किस जुनूँ के सताए हुए हैं लोग
हमसाए के लहू में नहाए हुए हैं लोग

ये तिश्नगी गवाह है घायल है इनकी रूह
चेहरे ही तबस्सुम से सजाए हुए हैं लोग

ग़ैरत मरी तो वाक़ई इंसान मर गया
जीने की सिर्फ़ रस्म निभाए हुए हैं लोग

कहने को कह रहे हैं मुबारक हो नया साल
खंज़र भी आस्तीं में छुपाए हुए हैं लोग

-अदम गोंडवी
[धरती की सतह पर, संपादक:ओम निश्चल, अनुज प्रकाशन, 2023]

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