मैं नहीं समझता, सात समुन्दर पार की अंग्रेजी का इतना अधिकार यहाँ कैसे हो गया। - महात्मा गांधी।

सृजन पर दो हिन्दी रुबाइयां

सृजन पर उदयभानु हंस की दो हिंदी रुबाइयां | Hindi Rubaiyan by Uday Bhanu Hans

अनुभूति से जो प्राणवान होती है,
उतनी ही वो रचना महान होती है।
कवि के ह्रदय का दर्द, नयन के आँसू,
पीकर ही तो रचना जवान होती है॥

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सुगंध जिसमें न हो वो सुमन नहीं होता,
सुरा का घूंट कभी आचमन नहीं होता।
प्रसव की पीड़ा जरूरी है एक माँ के लिए,
बिना तपस्या के लेखन 'सृजन' नहीं होता॥

-उदयभानु 'हंस'
 राजकवि, हरियाणा

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