भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

श्याम पिया मोरी रंग दे चुनरिया

रचनाकार: मीराबाई
रेटिंग: 0/5 (0 मत)

श्याम पिया मोरी रंग दे चुनरिया | मीरा के भजन | Bhajan by Meerabai

श्याम पिया मोरी रंग दे चुनरिया ।। टेर ।।

ऐसी वो रंग दे रंग नाई छूटे,
धोबनिया धोये चाहे सारी उमरिया।

बिना रंगाये बाहर ना जाऊँ,
चाहे तो बीत जाए सारी उमरिया।

लाल न ओढूँ पीली न ओढूँ,
ओढूँगी श्याम तेरी काली कमलिया।

गागर जो भर दे, सिर पे जो धर दे,
चलके बता दे श्याम तेरी नगरिया।

बाई मीरा कहे गिरधर नागर,
हरि के चरण चित्त लागी रे लगनिया।

- मीरा बाई

 

प्रतिक्रियाएं (Comments) - 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी आप करें!

टिप्पणी लिखें (Write a Comment)

CAPTCHA

मेरी पसंदीदा रचनाएँ

आपने अभी तक कोई रचना सहेज कर नहीं रखी है।