भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

शास्त्रीजी - कमलाप्रसाद चौरसिया | कविता

लाल बहादुर शास्त्री- कमलाप्रसाद चौरसिया | कविता | Lal Bahadur Shastri by Kamla Prasad Chaurasia - Hindi Poem

पैदा हुआ उसी दिन,
जिस दिन बापू ने था जन्म लिया
भारत-पाक युद्ध में जिसने
तोड़ दिया दुनिया का भ्रम।

एक रहा है भारत सब दिन,
सदा रहेगा एक।
युगों-युगों से रहे हैं इसमें
भाषा-भाव अनेक।

आस्था और विश्वास अनेकों
होते हैं मानव के।
लेकिन मानवता मानव की
रही सदा ही नेक।
कद से छोटा था लेकिन था
कर्म से बड़ा महान।
हो सकता है कौन, गुनो वह
संस्कृति की संतान।

-कमला प्रसाद चौरसिया

 

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