भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

साथ लिए जा

साथ लिए जा | Hindi Poem by Dr Ramesh Pokhriyal Nishank

दुर्गम और भीषण
बड़ी चट्टानें पार कर,
उसको भी तू साथ लिए जा
जो बैठा है हारकर।

क़दम-क़दम तू क़दम बढ़ा
संघर्ष कर जोखिम उठा,
फेंक निराशा को कोसों
तू आशा के गाने गा।

और तभी यह तेरा
लक्ष्य तुझे मिल जाएगा,
घोर अँधेरा चीरकर
तू सदा रोशनी पाएगा।

- रमेश पोखरियाल 'निशंक' 
      [जीवन-पथ में]

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