यह कैसे संभव हो सकता है कि अंग्रेजी भाषा समस्त भारत की मातृभाषा के समान हो जाये? - चंद्रशेखर मिश्र।

सब की दुनिया एक

सब की दुनिया एक | द्वारिकाप्रसाद महेश्वरी की बाल कविता

धरती है हम सब की एक
आसमान हम सब का एक
सूरज है हम सब का एक
चंदा है हम सब का एक
पानी है हम सब का एक
और पवन है सब का एक
है दुनिया में लोग अनेक
लेकिन सब की दुनिया एक

-द्वारिकाप्रसाद महेश्वरी

 

प्रतिक्रियाएं (Comments) - 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी आप करें!

टिप्पणी लिखें (Write a Comment)

CAPTCHA

मेरी पसंदीदा रचनाएँ

आपने अभी तक कोई रचना सहेज कर नहीं रखी है।