अंग्रेजी के माया मोह से हमारा आत्मविश्वास ही नष्ट नहीं हुआ है, बल्कि हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान भी पददलित हुआ है। - लक्ष्मीनारायण सिंह 'सुधांशु'।

सब की दुनिया एक

सब की दुनिया एक | द्वारिकाप्रसाद महेश्वरी की बाल कविता

धरती है हम सब की एक
आसमान हम सब का एक
सूरज है हम सब का एक
चंदा है हम सब का एक
पानी है हम सब का एक
और पवन है सब का एक
है दुनिया में लोग अनेक
लेकिन सब की दुनिया एक

-द्वारिकाप्रसाद महेश्वरी

 

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