भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

रिश्ते

Rishte | Relations by Rohit Kumar Happy

कुछ खून से बने हुए
कुछ आप हैं चुने हुए
और कुछ...
हमने बचाए हुए हैं
टूटने-बिखरने को हैं..
बस यूं समझो..
दीवार पर टंगें कैलंडर की तरह,
सजाए हुए हैं।

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- रोहित कुमार 'हैप्पी'
  संपादक, भारत-दर्शन
  न्यूज़ीलैंड


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