विदेशी भाषा का किसी स्वतंत्र राष्ट्र के राजकाज और शिक्षा की भाषा होना सांस्कृतिक दासता है। - वाल्टर चेनिंग

प्यार !

प्यार | Hindi Poem by Ramchandra Shukla

प्यार! कौन सी वस्तु प्यार है? मुझे बता दो।
किस को करता कौन प्यार है ? यही दिखा दो।।

पृथ्वीतल पर भटक भटक समय गँवाया!
ढूँढा मैंने बहुत प्यार का पता न पाया ।।

यों खो कर के अपना हृदय, पाया मैंने बहुत दुख।
पर यह भी तो जाना नहीं, होता है क्या प्यार-सुख।।

-पं० रामचन्द्रजी शुक्ल 
 (सरस्वती)

 

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