कोई कौम अपनी जबान के बगैर अच्छी तालीम नहीं हासिल कर सकती। - सैयद अमीर अली 'मीर'।

प्रेम के कई चेहरे

प्रेम के कई चेहरे | सुषम बेदी की कविता | Hindi poem by Susham Bedi

वाटिका की तापसी सीता का
नकटी शूर्पणखा का
चिर बिरहन गोपिका का
जुए में हारी द्रौपदी का
यम को ललकारती
सावित्री का।

-सुषम बेदी

[सुषम बेदी की कविता]

 

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