अकबर से लेकर औरंगजेब तक मुगलों ने जिस देशभाषा का स्वागत किया वह ब्रजभाषा थी, न कि उर्दू। -रामचंद्र शुक्ल

प्रार्थना

प्रार्थना | सोहनलाल द्विवेदी की बाल कविता

प्रभो,
न मुझे बनाओ हिमगिरि,
जिससे सिर पर इठलाऊँ। प्रभो, न मुझे बनाओ गंगा,
जिससे उर पर लहराऊँ।

प्रभो,
न मुझे बनाओ उपवन,
जिससे तन की छबि होऊँ।
प्रभो, बना दो मुझे सिंधु,
जिससे भारत के पद धोऊँ॥

-सोहनलाल द्विवेदी

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